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फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत के पहले एआई-सक्षम एमएएलई कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम ‘FWD कालभैरव’ की तैयारियों की घोषणा की

$30 मिलियन का निर्यात आदेश प्राप्त

  • इस प्लेटफ़ॉर्म को दक्षिण एशिया के एक राष्ट्र से $25 मिलियन का निर्यात आदेश प्राप्त हुआ है, जो कुल $30 मिलियन के समझौते का हिस्सा है।
  • भारत का ‘कालभैरव’, सशस्त्र सेनाओं की MALE UAV आवश्यकता को पूरा करने हेतु तत्पर।
  • “राष्ट्र का काल से परे संरक्षक”, एक एआई-सक्षम प्रहरी जो आकाश को सुरक्षित करते हुए वैश्विक विश्वास का प्रतीक बन रहा है।
  • उन्नत डिज़ाइन से लैस, यह प्रणाली 30 घंटे तक की उड़ान क्षमता और 3,000 किमी की रेंज प्रदान करने में सक्षम है।
  • एक प्रीडेटर ड्रोन की क्षति से लगभग ₹1000 करोड़ का नुकसान हो सकता है, जबकि इसी निवेश से ‘काल भैरव’ ड्रोन का एक पूरा बेड़ा तैनात किया जा सकता है, जिससे किसी एक ड्रोन की हानि से मिशन क्षमता प्रभावित नहीं होती।
  • 80% स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्लेटफ़ॉर्म किसी भी किल-स्विच खतरे से मुक्त है तथा डेटा रूटिंग पर विदेशी नियंत्रण की संभावना नहीं, जिससे संपूर्ण परिचालन स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
  • प्रिडेटर की लागत का मात्र 1/10 होने के बावजूद, कालभैरव सक्षम है — स्वार्म वारफेयर, मल्टी-एंगल प्रिसीजन स्ट्राइक्स और आईएसआर रेडंडंसी जैसे आधुनिक युद्ध तकनीकों को प्रभावी रूप से अंजाम देने में।

बेंगलुरु, 26 अगस्त 2025: भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस (FWDA) ने आज देश के पहले पूर्णत: स्वदेशी एवं निर्यात-योग्य मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) स्वायत्त कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की तैयारी की औपचारिक घोषणा की। यह कार्यक्रम बेंगलुरु स्थित ‘द ललित अशोक’ में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान संपन्न हुआ।

काल भैरव, जो समय के शाश्वत रक्षक हैं, से प्रेरित यह प्लेटफ़ॉर्म पूरी तरह से स्वदेश में डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। यह एयरक्राफ्ट 30 घंटे तक की उड़ान क्षमता और 3000 किलोमीटर की मारक दूरी प्रदान करने के लिए इंजीनियर किया गया है।  

परीक्षण उड़ान के वीडियो प्रस्तुतिकरण के पश्चात, कंपनी ने घोषणा की कि इस अत्याधुनिक प्लेटफ़ॉर्म को दक्षिण एशिया के एक राष्ट्र से $25 मिलियन का ऐतिहासिक निर्यात आदेश प्राप्त हुआ है, जो कुल $30 मिलियन के एक रणनीतिक समझौते का हिस्सा है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इस ओर स्पष्ट संकेत देती है कि विश्व भर में भारतीय नवाचार पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है, विशेष रूप से अपनी वायु सीमाओं की रक्षा हेतु। साथ ही, यह भारत को एआई-आधारित युद्ध प्रणालियों का अग्रणी नवप्रवर्तक और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करता है।

इस अवसर पर फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सुहास तेजस्कंद ने कहा:  “पिछले कई दशकों तक भारत को प्रिडेटर श्रेणी की प्रणालियों और इज़राइली सर्चर मॉडलों जैसे विदेशी प्लेटफ़ॉर्म्स पर निर्भर रहना पड़ा, जिसकी रणनीतिक कीमत भी हमें चुकानी पड़ी — चाहे वह एम्बेडेड किल-स्विच जैसी अंतर्निहित कमजोरियाँ हों या फिर महत्वपूर्ण फ्लाइट डेटा का विदेशी सर्वरों के माध्यम से रूट किया जाना। आज वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों ने इस वर्ष एक नया मोड़ लिया है, विशेष रूप से पिछले वर्ष हस्ताक्षरित बहुप्रचारित रक्षा समझौते पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा: “अमेरिका के रक्षा विनियमों के सख्त होते जाने और वैश्विक नीतियों में हो रहे बदलावों के बीच, भारत युद्धकाल में डिजिटल निर्भरता का जोखिम नहीं उठा सकता। विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित कर सकती है, क्योंकि संवेदनशील संचालन संबंधी डेटा बाहरी नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित हो सकता है और विदेशी एजेंसियों की पहुँच में रह सकता है।”

आत्मनिर्भर भारत के विज़न के तहत विकसित, FWD कालभैरव E2A2 (Economic & Efficient Autonomous Aircraft) एक उन्नत एआई-सक्षम युद्ध तत्परता प्रदान करता है — वह भी प्रिडेटर श्रेणी के MQ-9 रीपर जैसे सिस्टम्स की लागत के मात्र एक-दसवे भाग में। जहाँ महंगे आयातित प्लेटफ़ॉर्म्स न केवल लॉजिस्टिक चुनौतियाँ लेकर आते हैं, बल्कि रणनीतिक कमजोरियाँ भी उत्पन्न करते हैं, वहीं कालभैरव बेहतर कॉम्बैट वैल्यू और सक्रिय प्रतिरोधक क्षमता के साथ एक सशक्त विकल्प प्रस्तुत करता है। स्वार्म वारफेयर क्षमताओं से सुसज्जित यह प्लेटफ़ॉर्म मल्टी-एंगल प्रिसीजन स्ट्राइक्स को अंजाम देने में सक्षम है तथा कोऑर्डिनेटेड ऑटोनोमस स्वार्म्स के माध्यम से दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर सकता है — जिससे यह भविष्य के युद्धों के लिए एक ‘फ़ोर्स मल्टिप्लायर’ के रूप में उभरता है।

विशेषताएं :

श्रृंखला E2A2 (इकोनॉमिक एंड एफिशिएंट ऑटोनोमस एयरक्राफ्ट)
कॉन्फ़िगरेशन ट्विन बूम
विंग स्पैन 6.5 मीटर (सिरे से सिरे तक)
पेलोड क्षमता 91 किलोग्राम (EOIR सेंसर + मिसाइल/ लेजर गाइडेड रॉकेट + अतिरिक्त ईंधन)
उड़ान ऊंचाई 20,000 फीट तक
रेंज 3000 किलोमीटर ( सैटकॉम सहित)
एंड्यूरेंस अधिकतम 30 घंटे तक
एआई-सक्षम स्वायत्तता एडेप्टिव टार्गेटिंग, स्वायत्त उड़ान मार्ग निर्धारण, एवं लाइव कॉम्बैट निर्णय क्षमता

युद्धक्षेत्र की अर्थव्यवस्था की बात करें तो, दस कालभैरव विमानों की निगरानी क्षमता एक ही प्रिडेटर विमान के बराबर होती है, वह भी बहुत कम लागत पर। जहाँ एक प्रिडेटर के क्षतिग्रस्त होने लगभग ₹1000 करोड़ तक का खर्च आता है, वहीं समान निवेश में पूरा कालभैरव बेड़ा तैनात किया जा सकता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी एक विमान की हानि से मिशन की क्षमता बाधित न हो।

इसके अतिरिक्त, एफडब्ल्यूडी काल भैरव शून्य विदेशी OEM निर्भरता प्रदान करता है, क्योंकि प्रत्येक प्रमुख तकनीक स्वदेश में ही विकसित की गई है। यह एक सुरक्षित, प्रतिबंध-प्रतिरोधी और स्वतंत्र आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करता है, जिसमें किसी भी प्रकार की परिचालन संबंधित बाधा नहीं होती। यह स्वायत्त विमान एक पूर्णतः स्वदेशी MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराता है, जिससे तेज़ टर्नअराउंड, कम जीवनचक्र लागत और महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स तक निर्बाध पहुंच संभव होती है।”

स्वदेशी, मॉड्यूलर और निर्यात योग्य विकल्प के रूप में डिज़ाइन किया गया यह निर्यात-तैयार प्लेटफ़ॉर्म भारत की उस परिवर्तन यात्रा का प्रतीक है, जिसमें देश विश्व के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक होने से उभरते हुए अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक का वैश्विक निर्यातक बन रहा है।

तेजस्कंद ने आगे कहा, “कालभैरव एक विश्वसनीय ‘काल से परे संरक्षक’ के रूप में खड़ा है — एक एआई-सक्षम प्रहरी जो राष्ट्रों के आकाश की सुरक्षा करता है, वैश्विक विश्वास को प्रेरित करता है, अपनी रणनीतिक पहुँच का विस्तार करता है, और स्वायत्त युद्ध के भविष्य को पुनर्परिभाषित करता है।”

इस रणनीतिक छलांग के साथ, कंपनी अपनी वैश्विक विस्तार योजना को साकार करने के लिए तैयार है और अगले पाँच वर्षों में सात देशों में सात वैश्विक मुख्यालय स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना ‘मिशन 777’ लॉन्च करने जा रही है, जो एआई-संचालित युद्धक्षमता में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करेगी।

फ्लाइंग वेज डिफेंस के बारे में: “जवानों को बचाना, किसान की सेवा करना”

वेबसाइट: https://fwdefence.com/

फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस (FWDA) भारत की अग्रणी एआई युद्ध प्रणाली और स्वायत्त कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कंपनी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। यह कंपनी 2022 में सुहास तेजस्कंद द्वारा स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य था — भारत की महंगी वायु रक्षा आयातों पर निर्भरता कम करना और देश को अत्याधुनिक एयरोस्पेस नवाचार में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसरित करना।

कंपनी ने इतिहास रचते हुए स्वदेशी मानवरहित विमान (UAV) के लिए DGCA टाइप सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाली भारत की पहली संस्था बनने का गौरव हासिल किया। इसके तुरंत बाद, कंपनी ने भारत का पहला मानवरहित बॉम्बर विमान FWD-200B पेश किया, जिसने 3 सितंबर 2024 को अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की — जो भारत की रक्षा और विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।

रक्षा के परे, FWDA ने कृषि उपयोग के लिए पेटेंटेड एआई-एमएल आधारित ड्रोन भी विकसित किए हैं, जो वास्तविक समय में विश्लेषण प्रदान करते हैं, और इस प्रकार द्वि-उपयोग नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हैं। स्वायत्त स्ट्राइक सिस्टम, किलर ड्रोन, और स्केलेबल मानवरहित समाधान के मजबूत पोर्टफोलियो के साथ, FWDA का लक्ष्य भारत को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के एआई युद्ध एवं लड़ाकू UAV निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का है।

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